भारत में कमजोर पड़ा मानसून, अगले 2 हफ्तों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

New Delhi: भारत में मानसून इस समय कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो हफ्तों यानी 2 सितंबर तक देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है। शनिवार तक देश में कुल बारिश सामान्य से 14 फीसदी कम दर्ज की गई है।
IMD के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी बारिश की कमी बनी रह सकती है। मानसून की अक्षीय रेखा यानी मानसून ट्रफ इस समय हिमालय की तलहटी के आसपास बनी हुई है। इसके चलते मध्य भारत में अपेक्षित बारिश नहीं हो पा रही है।
इन इलाकों में भारी बारिश की संभावना
हालांकि, हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर तथा पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं, प्रायद्वीपीय भारत में अगले सप्ताह बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान है।
उत्तर बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट के पास अगले 24 घंटे में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 26 अगस्त तक ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मानसून ट्रफ की स्थिति बनी चिंता
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून ट्रफ का हिमालय की तलहटी में टिके रहना चिंता का विषय है। आमतौर पर अगस्त के दौरान यह रेखा दक्षिण की ओर खिसकती है और मध्य भारत में अच्छी बारिश कराती है। इस बार इसके उत्तर में बने रहने से मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की कमी बनी हुई है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की कमी भी एक जैसी नहीं है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से करीब 26 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र में यह कमी 23 फीसदी है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश 11 फीसदी कम है। मध्य भारत में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और यहां कमी करीब 3 फीसदी है।
खरीफ फसलों पर बढ़ सकता है असर
मानसून की अनियमित बारिश का असर खेती पर भी पड़ने की आशंका है। खासकर बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में बोई गई खरीफ फसलों को चिंता का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात के बारिश पर निर्भर इलाकों में इस साल मानसून असमान रहा है। बारिश की कमी बढ़ने पर अरहर, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
कम बारिश का असर खाद्य कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अगर मानसून की स्थिति और बिगड़ती है तो आने वाले दिनों में खाद्य महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
अल नीनो भी बढ़ा रहा चिंता
इस साल कमजोर मानसून के पीछे अल नीनो को भी एक अहम कारण माना जा रहा है। ब्रिटेन के मौसम विभाग के अनुसार, मौजूदा अल नीनो स्थिति और मजबूत हो सकती है। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने की संभावना जताई गई है।
फिलहाल IMD ने अगले दो हफ्तों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान दिया है। ऐसे में अगस्त के आखिरी दिनों और सितंबर की शुरुआत में होने वाली बारिश देश के जल संकट और खरीफ फसलों की स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।





