IIT दिल्ली छात्र की मौत: ‘मम्मी, मैं बहुत परेशान हूं…’, मौत से एक दिन पहले मां से कही थी ये बात

IIT दिल्ली में 31 वर्षीय MSc Physics छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद परिवार ने संस्थान में पढ़ाई के दौरान सामने आई परेशानियों और उसके मानसिक संघर्ष को लेकर कई गंभीर बातें बताई हैं। ऋषिकेश की मां के मुताबिक, मौत से एक दिन पहले उनके बेटे ने उनसे अपनी तकलीफ साझा की थी और आत्महत्या के विचार आने की बात कही थी।
NDTV से बातचीत में ऋषिकेश की मां आशा पोद्दार ने बताया कि मौत से एक रात पहले उनका बेटा काफी रोया था। मां के मुताबिक, उसने कहा था कि वह बहुत परेशान है और उसे आत्महत्या का डर भी लग रहा है। उसने अपनी पढ़ाई में लगातार आ रही परेशानियों और खुद को असफल महसूस करने की बात भी कही थी।
ऋषिकेश 31 साल के थे और IIT दिल्ली में MSc Physics की पढ़ाई कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, 22 अगस्त को संस्थान के परिसर में उनकी मौत हुई। उन्हें IIT के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बताया कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। उनके पास से मिला मोबाइल फोन जांच के लिए जब्त किया गया है।
पिता की मौत के बाद पढ़ाई में आई मुश्किलें
परिवार के मुताबिक, ऋषिकेश को पढ़ाई का काफी शौक था और IIT में दाखिला लेना उनका बड़ा सपना था। उनकी मां ने बताया कि पिता की मौत के बाद उन्हें 2014 में NIT राउरकेला की पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। बाद में उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से Physics में ग्रेजुएशन किया और 2025 में IIT दिल्ली में दाखिला लिया।
ऋषिकेश के भाई अभिषेक कुमार ने भी NDTV से बातचीत में बताया कि उनका भाई पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर था। पहले सेमेस्टर में उसने 10 में से 8 CGPA हासिल किया था, लेकिन बाद में उसकी परेशानियां बढ़ती चली गईं।
भाई ने बताया- दो बार जान देने की कोशिश की थी
अभिषेक ने दावा किया कि ऋषिकेश ने मौत से पहले दो बार अपनी जान लेने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, ऋषिकेश ने परिवार को बताया था कि वह कॉलेज की नौवीं मंजिल तक गया था।
भाई का आरोप है कि ऋषिकेश हॉस्टल में कमरा नहीं मिलने से भी काफी परेशान था। परिवार के मुताबिक, वह कॉलेज के बाहर एक छोटे कमरे में रह रहा था और उसे लगता था कि बाहर रहकर पढ़ाई करना उसके लिए मुश्किल हो रहा है।
परिवार ने कॉलेज की भूमिका पर उठाए सवाल
ऋषिकेश के भाई ने IIT प्रशासन पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इलाज के बाद डॉक्टरों ने ऋषिकेश को पढ़ाई जारी रखने के लिए फिट बताया था, लेकिन संस्थान की ओर से दोबारा मेडिकल मंजूरी की प्रक्रिया की गई।
परिवार का यह भी दावा है कि ऋषिकेश को अपने रिसर्च प्रोजेक्ट में भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। हालांकि, ये परिवार की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
IIT दिल्ली ने क्या कहा?
IIT दिल्ली ने छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित की है। संस्थान के मुताबिक, ऋषिकेश को पहले भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता दी गई थी और उन्हें संस्थान के डॉक्टर व काउंसलर से इलाज और काउंसलिंग मिली थी।
संस्थान ने बताया कि परिवार के अनुरोध पर उन्हें विशेष अस्पताल में करीब एक महीने तक इलाज भी कराया गया था। बाद में उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड की समीक्षा की गई और उन्हें माता-पिता की निगरानी में रहने की सलाह दी गई थी। उनके सेमेस्टर से withdrawal के अनुरोध को भी मंजूरी दी गई थी।
इस मामले को लेकर IIT दिल्ली के छात्र विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि पिछले करीब 30 महीनों में संस्थान में आठ छात्रों की आत्महत्या से मौत हुई है और वे संस्थान में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। ऋषिकेश की मौत के पीछे की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगी। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है।





