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मुंबई के राजा से लालबागचा राजा तक: जानिए भारत के 5 सबसे प्रसिद्ध गणपति पंडालों का इतिहास

गणेश उत्सव भारत का एक बेहद लोकप्रिय और भव्य त्योहार है, खासकर महाराष्ट्र में इसका उत्साह देखने लायक होता है। इन 10 दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में सजे गणपति पंडाल लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र होते हैं।

आइए जानते हैं भारत के उन 5 सबसे प्रसिद्ध गणपति पंडालों के इतिहास के बारे में, जिनकी भव्यता और मान्यता देश-दुनिया में फैली हुई है।

1. लालबागचा राजा (मुंबई) – ‘नवसाचा गणपति’

मुंबई का लालबागचा राजा देश का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय गणेश पंडाल है। इसकी स्थापना साल 1934 में लालबाग मार्केट के मछुआरों और दुकानदारों द्वारा की गई थी। इस मूर्ति को ‘नवसाचा गणपति’ (मनोकामना पूरी करने वाला) कहा जाता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु और बॉलीवुड सेलिब्रिटीज बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

2. जीएसबी सेवा मंडल, किंग सर्कल (मुंबई) – सबसे अमीर बप्पा

माटुंगा के जीएसबी सेवा मंडल का यह पंडाल अपनी भव्यता और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। इसकी शुरुआत सारस्वत ब्राह्मण समुदाय द्वारा की गई थी। यह पंडाल अपनी अत्यधिक सुरक्षा और बप्पा को अर्पित किए जाने वाले करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के गहनों के कारण ‘सबसे अमीर गणपति’ के रूप में भी प्रसिद्ध है।

3. दगड़ूशेठ हलवाई गणपति (पुणे) – ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर

महाराष्ट्र के पुणे में स्थित श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। इसकी स्थापना एक प्रसिद्ध मिठाई व्यवसायी दगड़ूशेठ गाडवे ने की थी। लोकमान्य तिलक के समय से ही इस पंडाल का स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक एकता में बड़ा योगदान रहा है। यहां की स्वर्ण प्रतिमा बेहद आकर्षक है।

4. खेतवाड़ी गजानन महाराज (मुंबई) – अपनी भव्यता के लिए मशहूर

मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थित खेतवाड़ी का यह सार्वजनिक गणेशोत्सव अपनी विशाल और सुंदर मूर्तियों के लिए जाना जाता है। इसकी स्थापना 1959 में हुई थी। यह पंडाल कई बार अपनी भव्य थीम और 15 फीट तक ऊंची मूर्तियों के कारण प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुका है।

5. खैरातबाद गणेश (हैदराबाद) – विशालकाय प्रतिमा का आकर्षण

मुंबई और पुणे के अलावा दक्षिण भारत के हैदराबाद का खैरातबाद गणेश पंडाल अपनी विशालकाय मूर्तियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसकी शुरुआत 1954 में एस. श्यामा बइया ने की थी। हर साल यहां गणपति की सबसे ऊंची मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

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One Comment

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