मानसून सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में गूंजा हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद, खरगे बोले- ‘यह हिंदू धर्म के भी खिलाफ’

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रैली स्थल पर हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासत गरमा गई है। खरगे ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए इसे जातिगत भेदभाव और समाज को बांटने वाली मानसिकता से जोड़ा है। वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह मामला खरगे की जाति से जुड़ा नहीं है।
मामला हल्द्वानी के रामलीला मैदान का है, जहां खरगे ने शनिवार को ‘विजय शंखनाद’ रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को ‘श्री राम सेना’ नाम के एक दक्षिणपंथी संगठन ने उसी जगह पर ‘शुद्धिकरण’ हवन किया।
संसद में खरगे ने उठाया मुद्दा
मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को खरगे ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि रैली के दौरान उन्होंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया था और सिर्फ सरकार से जुड़े मुद्दों पर बात की थी।
खरगे ने सवाल उठाया कि जब रामलीला मैदान का इस्तेमाल सभी राजनीतिक दलों की सार्वजनिक सभाओं के लिए होता है, तो उनके कार्यक्रम के बाद वहां ‘शुद्धिकरण’ की जरूरत क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ हैं और समाज में जाति व धर्म के नाम पर दूरी बढ़ाने का काम करती हैं।
नड्डा बोले- घटना दुर्भाग्यपूर्ण
खरगे के आरोपों पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने साफ किया कि इस आयोजन में बीजेपी के सदस्य शामिल नहीं थे और मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
वहीं, उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि ‘श्री राम सेना’ का संबंध बीजेपी से है। बीजेपी ने इस आरोप से इनकार किया है।
गोदियाल ने दावा किया कि खरगे के दलित समुदाय से होने के कारण ही यह अनुष्ठान किया गया। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की लोकतांत्रिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि खरगे की रैली के दौरान कुछ ऐसे नारे लगाए गए थे, जिनसे सनातन समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
खजान दास ने कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक महत्व वाला स्थान है और वहां दूसरे धर्म से जुड़े नारों को लेकर लोगों में नाराजगी थी।
बीजेपी ने यह भी कहा कि ‘शुद्धिकरण’ की घटना को खरगे की जाति से जोड़ना सही नहीं है। पार्टी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उसके पुराने दलित नेताओं के साथ व्यवहार का भी मुद्दा उठाया।
फिलहाल, रामलीला मैदान में हुए इस ‘शुद्धिकरण’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं और मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है।





