10 साल बाद कच्छ में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का जन्म, संरक्षण प्रयास सफल

भारत में विलुप्ति के कगार पर खड़े दुर्लभ पक्षी Great Indian Bustard (गोडावण) के संरक्षण को बड़ी सफलता मिली है। Kutch के अब्दासा क्षेत्र में 10 साल बाद इस पक्षी के एक स्वस्थ चूजे का जन्म हुआ है, जिसे वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता
इस उपलब्धि के पीछे Wildlife Institute of India, गुजरात और राजस्थान के वन विभाग और केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय का संयुक्त प्रयास रहा। अधिकारियों के अनुसार, यह सफलता ‘जंपस्टार्ट अप्रोच’ नाम की आधुनिक तकनीक के जरिए हासिल की गई है, जिससे इस दुर्लभ प्रजाति के प्रजनन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कैसे संभव हुआ यह संरक्षण
कच्छ में गोडावण की संख्या में नर पक्षियों की कमी के कारण अंडे निष्फल हो रहे थे। इस समस्या को दूर करने के लिए राजस्थान के ब्रीडिंग सेंटर से एक निषेचित अंडा लाया गया। करीब 19 घंटे की यात्रा के बाद इसे सुरक्षित कच्छ पहुंचाया गया और वहां मादा पक्षी के घोंसले में रखा गया। 26 मार्च को उसी अंडे से एक स्वस्थ चूजे का जन्म हुआ, जो संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है।
बढ़ रही है उम्मीद और संख्या
इस प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के सैम और रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में अब गोडावण की संख्या बढ़कर 73 तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से आने वाले समय में इस प्रजाति को बचाने में मदद मिलेगी। फिलहाल वन विभाग की टीम चूजे और मादा पक्षी की लगातार निगरानी कर रही है।





