राजनीति

ऑपरेशन सिंदूर से UNSC तक – जयशंकर के भाषण की 10 अहम बातें

राज्यसभा में आज विदेश मंत्री एस. जयशंकर का भाषण भारत की कूटनीतिक नीति, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ पर सरकार के रुख को लेकर बेहद अहम रहा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में उन्होंने विपक्ष पर जमकर हमला बोला और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति को मजबूती से रखा। जयशंकर ने साफ कहा कि अब आतंकवाद, परमाणु धमकियों और बातचीत का युग खत्म हो चुका है। उन्होंने अमेरिका, पाकिस्तान, चीन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े कई बड़े खुलासे भी किए। जानिए, विदेश मंत्री के इस भाषण के 10 सबसे अहम बिंदु:

अमेरिका की चेतावनी और भारत की सख्त प्रतिक्रिया

जयशंकर ने बताया कि 9 मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर पाकिस्तान के संभावित हमले की सूचना दी। प्रधानमंत्री ने तुरंत जवाब दिया कि अगर हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब मिलेगा, और वैसा ही हुआ। भारतीय सेना ने पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम तबाह कर दिया।

संघर्षविराम में नहीं हुई किसी देश की मध्यस्थता

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने खुद डीजीएमओ स्तर पर संघर्षविराम की अपील की, इसमें किसी भी देश की कोई मध्यस्थता नहीं हुई और न ही इसका व्यापार से कोई लेना-देना है।

मोदी-ट्रंप के बीच कोई संवाद नहीं

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए जयशंकर ने कहा कि 22 अप्रैल से 16 जून तक प्रधानमंत्री मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। इससे संघर्षविराम को लेकर विदेशी हस्तक्षेप की बात पूरी तरह गलत साबित होती है।

UNSC में भारत के पक्ष में आया बयान

जयशंकर ने बताया कि 25 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए जिम्मेदारों को सजा दिलाने की मांग की, जबकि उस समय भारत सदस्य नहीं था और पाकिस्तान था। इसके बावजूद भारत के पक्ष में बयान आना बड़ी कूटनीतिक जीत है।

चीन-पाक गठजोड़ की नींव UPA सरकार में रखी गई

जयशंकर ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान का रणनीतिक गठजोड़ 2005-06 में शुरू हुआ, जब ग्वादर और हंबनटोटा बंदरगाह, मुक्त व्यापार समझौता और चीन को रणनीतिक साझेदार का दर्जा दिया गया। उन्होंने कहा कि जो आज सवाल कर रहे हैं, वही इसे मजबूत कर गए।

‘चीन गुरु’ विपक्ष को दिया तंजभरा जवाब

जयशंकर ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष में कई ऐसे नेता हैं जो चीन के ‘गुरु’ बन गए हैं, लेकिन उनका ज्ञान सिर्फ ओलंपिक और क्लासरूम तक सीमित है। उन्होंने कहा कि चीन से डील करने में मेरे 41 साल के अनुभव को नजरअंदाज करना हास्यास्पद है।

भारत की स्पष्ट नीति – आतंक और बातचीत साथ नहीं

विदेश मंत्री ने दो टूक कहा कि भारत की नीति साफ है – “बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते, परमाणु धमकी अब नहीं चलेगी और खून-पानी साथ नहीं बहेंगे।” मोदी सरकार ने आतंकवाद पर बिलकुल स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है।

मुंबई हमले के बाद चुप रहने वालों पर तंज

जयशंकर ने विपक्ष को याद दिलाया कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद भी पिछली सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, और आज वही लोग पीओके और आतंकवाद पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो खुद चुप रहे, उन्हें आज ज्ञान नहीं देना चाहिए।

कश्मीर पर कोई मध्यस्थता नहीं – सिर्फ द्विपक्षीय समाधान

उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इस पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं होगी। भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय स्तर पर ही बातचीत संभव है, अगर आतंकवाद से मुक्त माहौल हो।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश नीति की सफलता

जयशंकर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गए भारतीय प्रतिनिधिमंडलों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन प्रतिनिधियों ने भारत का पक्ष मजबूती से रखा, और देश को उन पर गर्व है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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