Fraud and Scam

फर्जी पुलिस, नकली केस और करोड़ों की ठगी! ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार हुई महिला

मछलीपट्टनम: आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारी बनकर एक महिला को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और उससे 1.43 करोड़ रुपये ठग लिए। ठगों ने महिला से कहा था कि उसके पैसों की ‘फॉरेंसिक जांच’ की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी।

पीड़िता की पहचान वी. अलिवेलु मंगम्मा के रूप में हुई है। वह मछलीपट्टनम के पारसपेट की रहने वाली हैं। ठगी का पता चलने के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

कृष्णा जिले के एसपी विद्या सागर नायडू ने बताया कि यह डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी साइबर ठगी का मामला है। उन्होंने कहा कि लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद लोग पुलिस और सरकारी अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल करने वाले साइबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं।

10 जून से शुरू हुआ ठगी का सिलसिला

मंगम्मा के मुताबिक, 10 जून को उन्हें कुछ लोगों के फोन आए। उन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया। आरोपियों ने कहा कि उनके नाम से कुछ लोगों को परेशान करने वाले संदेश भेजे गए हैं और दिल्ली के एक थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।

इसके बाद ठगों ने महिला को एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली की एक सरकारी बैंक शाखा में उनके नाम से खाता खोला गया था और उसमें संदिग्ध लेन-देन हुआ है। ठगों ने यह भी कहा कि इस मामले में गोयल नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

इसके बाद महिला को डराने के लिए आरोपियों ने कहा कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश का नाम लेकर यह दावा भी किया कि महिला को 24 घंटे के अंदर ‘मुख्य न्यायाधीश’ के सामने पेश किया जाएगा। आरोपियों ने इसे एक ‘राष्ट्रीय गुप्त मामला’ बताया।

फॉरेंसिक जांच के नाम पर ट्रांसफर कराए पैसे

राहुल गुप्ता और निशा पटेल नाम के दो लोगों ने खुद को जांच अधिकारी बताया। उन्होंने महिला से उसकी संपत्ति और बैंक खातों की पूरी जानकारी मांगी। इसके बाद कहा गया कि उसके सभी पैसे फॉरेंसिक जांच के लिए एक खाते में ट्रांसफर करने होंगे। महिला को भरोसा दिया गया कि जांच में निर्दोष पाए जाने के तीन दिन के अंदर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।

ठगों की बातों पर विश्वास करके महिला ने अपनी एफडी तुड़वाई और 1.05 करोड़ रुपये RTGS के जरिए आरोपियों के बताए खाते में भेज दिए। इसके बाद कथित तौर पर आधिकारिक और नोटरी किए हुए दस्तावेज भेजकर उनसे करीब 39 लाख रुपये और ट्रांसफर करा लिए गए।

95 लाख रुपये और मांगने पर हुआ शक

जुलाई में कुछ समय तक ठगों ने महिला से संपर्क नहीं किया। लेकिन 29 जुलाई को उन्होंने फिर फोन किया और दावा किया कि महिला ने अपनी बताई गई पूरी रकम ट्रांसफर नहीं की है। इसके बाद आरोपियों ने उसकी संपत्ति जब्त करने की धमकी देते हुए 95 लाख रुपये और मांगे।

महिला ने बताया कि आरोपियों ने उसे अपनी संपत्ति गिरवी रखने, सोना-चांदी रखने या रिश्तेदारों और दोस्तों से पैसे उधार लेने तक की सलाह दी। उससे तुरंत 20 लाख रुपये, अगले दो दिनों में 22 लाख रुपये और महीने के अंत तक 53 लाख रुपये जुटाने को कहा गया।

बार-बार पैसे मांगने पर महिला को शक हुआ। उन्होंने अमेरिका में रहने वाले अपने बेटे को पूरी बात बताई। बेटे की सलाह पर उन्होंने एक स्वयंसेवी संगठन के सदस्यों की मदद से पुलिस से संपर्क किया।

WhatsApp और IMO के जरिए करते थे संपर्क

पीड़िता के मुताबिक, ठग उससे WhatsApp और IMO ऐप के जरिए बात करते थे। कॉल के दौरान स्क्रीन पर ‘ED Surveillance Room’ और ‘Rahul Gupta’ नाम दिखाई देता था। हालांकि, आरोपियों ने कभी वीडियो कॉल में अपना चेहरा नहीं दिखाया।

महिला ने बताया कि उसके पति वी. वेंपटी गोपालकृष्ण, जो पंचायत राज विभाग से सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता हैं, को भी IMO ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा गया था। ठगों ने दंपती को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने इस जांच के बारे में किसी को बताया तो कथित आरोपी के साथी उनके बेटे को ट्रेस करके उसकी हत्या कर सकते हैं।

पुलिस अब पैसों के लेन-देन और आरोपियों की पहचान की जांच कर रही है। पुलिस लगातार लोगों को डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों को लेकर जागरूक भी कर रही है। एसपी विद्या सागर नायडू ने कहा कि कई पीड़ित पैसे ट्रांसफर करने के बाद पुलिस के पास पहुंचते हैं। तब तक ठग रकम को कई बैंक खातों में भेज चुके होते हैं, जिससे पैसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है।

पुलिस ने लोगों को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि असली पुलिस अधिकारी या कोई सरकारी एजेंसी किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही जांच, पैसे की जांच या गिरफ्तारी वारंट रद्द करने के नाम पर पैसे मांगती है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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