डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, CM देवेंद्र फडणवीस की नागरिकों को सख्त चेतावनी

साइबर फ्रॉड और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बढ़ता खतरा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे साइबर ठगों से पूरी तरह सतर्क रहें। उन्होंने साफ कहा है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई भी प्रक्रिया नहीं होती है। मुंबई में आयोजित एक साइबर-अवेयरनेस कार्यक्रम के दौरान CM फडणवीस ने बताया कि आजकल अपराधी वीडियो कॉल, फर्जी पहचान और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। वे लोगों को धमकाकर उनकी गाढ़ी कमाई ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लेते हैं।
कैसे जाल में फंसाते हैं ठग?
ठग अक्सर यह दावा करते हैं कि पीड़ित का फोन नंबर, बैंक खाता या पहचान किसी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़ी है। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी, CBI अफसर या जज बताकर कानूनी कार्रवाई का झूठा दबाव बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों को चेताया कि केवल पुलिस की वर्दी या आधिकारिक दिखने वाले दस्तावेजों और वीडियो कॉल को देखकर घबराएं नहीं। इस तरह के हथकंडे केवल पैनिक पैदा करने और जल्दबाजी में गलत वित्तीय फैसले लेने के लिए अपनाए जाते हैं।
AI तकनीक और वॉयस क्लोनिंग से बढ़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से साइबर फ्रॉड को पहचानना और कठिन होता जा रहा है। वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और AI-जनरेटेड ऑडियो-वीडियो के जरिए फर्जी कॉल और कम्युनिकेशंस को अधिक भरोसेमंद दिखाया जा रहा है। महाराष्ट्र साइबर ने साइबर अपराध के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम से एक शॉर्ट फिल्म और ‘1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम’ लॉन्च किया है, ताकि विज्ञापनों और सोशल मीडिया के जरिए व्यापक दर्शकों तक पहुंचा जा सके।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
अगर कोई साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाता है, तो तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें। ठगी के तुरंत बाद के कुछ मिनट पैसे को आगे बढ़ने से रोकने और उसकी रिकवरी की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए बेहद अहम होते हैं। नागरिकों के लिए मुख्य संदेश यही है कि कोई भी असली पुलिस अधिकारी, CBI अधिकारी या जज वीडियो कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं कर सकता है।






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