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दिल्ली: पुराने नोटों की अदला-बदली का रैकेट उजागर, 3.5 करोड़ के बंद नोट जब्त

नई दिल्ली – राजधानी की पुलिस ने एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए विमुद्रीकृत 500 और 1000 रुपये के नोटों का विशाल भंडार पकड़ा है. इस कार्रवाई में कुल 3.5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के प्रतिबंधित नोट बरामद किए गए हैं. इस धोखाधड़ी के आरोप में चार व्यक्तियों—हर्ष, टेक चंद्र ठाकुर, लक्ष्य और विपिन कुमार—को घटनास्थल से हिरासत में लिया गया है. ये लोग पीड़ितों को बंद नोटों की अदला-बदली का झांसा देकर ठगी करते थे. पूछताछ में इन्होंने स्वीकार किया है कि उन्हें पूरी तरह से ज्ञात था कि वे गैरकानूनी तरीके से नोटों का व्यापार कर रहे थे.

मेट्रो गेट के पास चल रहा था अवैध कारोबार

पुलिस को विश्वसनीय गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन के गेट संख्या 4 के निकट बड़े पैमाने पर विमुद्रीकृत नोटों का लेनदेन करने की योजना बना रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस दल ने तत्काल छापामारी की और सभी चार संदिग्धों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया.

छापेमारी के दौरान अधिकारियों को आरोपियों के कब्जे से पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों की विशाल खेप मिली, जिनका अंकित मूल्य 3.5 करोड़ रुपये से भी अधिक है. इसके साथ ही दो वाहन भी जब्त किए गए हैं, जिनका उपयोग गिरोह द्वारा इन नोटों के परिवहन के लिए किया जाता था.

कम कीमत पर बेचकर लोगों को बनाते थे शिकार

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार चारों अभियुक्त इन प्रतिबंधित नोटों को बेहद कम दरों पर खरीद-फरोख्त करते थे. ये लोग पीड़ितों को गुमराह करते हुए दावा करते थे कि इन नोटों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में बदलवाना संभव है, जबकि यह पूर्णतः असत्य है. यह स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी, षड्यंत्र और निर्दिष्ट बैंक नोट अधिनियम (Specified Bank Notes Act) का गंभीर उल्लंघन है.

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण

हर्ष – आयु 22 वर्ष, निवासी सेक्टर 25, रोहिणी
टेक चंद ठाकुर – आयु 39 वर्ष, निवासी सेक्टर 25, रोहिणी
लक्ष्य – आयु 28 वर्ष, निवासी बृजपुरी
विपिन कुमार – आयु 38 वर्ष, निवासी फीरोजशाह रोड, मूल निवासी हिमाचल प्रदेश

आरोपियों ने माना गुनाह

पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्हें भली-भांति पता था कि इतनी बड़ी मात्रा में बंद नोटों को रखना पूर्णतः गैरकानूनी है और उनके पास इन्हें रखने का कोई वैध औचित्य नहीं था. त्वरित धनार्जन की लालसा में ये इस अवैध धंधे का हिस्सा बन गए थे.

पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और आगे की जांच-पड़ताल जारी है. अधिकारियों का मानना है कि यह रैकेट और भी बड़ा हो सकता है और अधिक लोग इससे जुड़े हो सकते हैं, जिसकी गहन जांच की जा रही है.

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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