साइबर ठगों पर शिकंजा, रिटायर्ड शिक्षकों की ठगी गई रकम वापस दिलाने में मिली सफलता

नई दिल्ली: साइबर ठगी के शिकार हुए दो रिटायर्ड शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। गुजरात में अलग-अलग ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम के मामलों में एक रिटायर्ड शिक्षिका को ठगी की रकम का कुछ हिस्सा वापस मिला, जबकि दूसरी शिक्षिका की पूरी रकम बरामद कर ली गई।
अहमदाबाद के एलिसब्रिज इलाके की रहने वाली 73 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका से कथित तौर पर 11.42 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। अधिकारियों की मदद से ठगी की रकम के एक हिस्से को ट्रेस कर फ्रीज किया गया। इसके बाद शिक्षिका को 17 लाख रुपये वापस मिले।
इस मामले में कोर्ट के आदेश के तहत करीब 66.92 लाख रुपये से जुड़ी रकम को लेकर कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद की गई बाकी रकम भी पीड़िता को लौटाए जाने की उम्मीद है। मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है। वहीं, एक अन्य मामले में सूरत की रिटायर्ड शिक्षिका से साइबर ठगों ने कथित तौर पर 40 लाख रुपये ठग लिए थे। अधिकारियों के प्रयासों के बाद उनकी पूरी रकम बरामद कर ली गई।
अधिकारियों ने बताया कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस से पहले कई रिटायर्ड शिक्षकों के साइबर फ्रॉड में फंसे पैसों को ट्रेस कर वापस दिलाने की कोशिश की गई थी। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के SP संजय केशवाला ने कहा कि इन मामलों में पीड़ितों की रकम वापस दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। दोनों मामले नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए दर्ज किए गए थे।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI, टेलीकॉम विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। वे पीड़ित को किसी अपराध में फंसने या गिरफ्तार होने का डर दिखाते हैं और कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
अधिकारियों ने लोगों, खासकर बुजुर्गों को सलाह दी है कि ऐसे फोन आने पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें और बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें।





