48 साल बाद खाली करना होगा दफ्तर? कांग्रेस को नोटिस, बढ़ा सियासी विवाद

New Delhi: Indian National Congress को उसके ऐतिहासिक मुख्यालय 24, अकबर रोड को 28 मार्च तक खाली करने का नोटिस मिलने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। यह कदम लुटियंस दिल्ली में कांग्रेस की दशकों पुरानी मौजूदगी पर सवाल खड़ा कर रहा है।
1978 से जुड़ा है अकबर रोड दफ्तर
1978 से कांग्रेस इस बंगले का उपयोग कर रही है और यह सिर्फ एक दफ्तर नहीं, बल्कि पार्टी की राजनीतिक पहचान का केंद्र रहा है। यहीं से कई बड़े फैसले लिए गए, चुनावी रणनीतियां बनीं और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय हुई। अकबर रोड स्थित यह मुख्यालय कांग्रेस के इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है।
युवा कांग्रेस दफ्तर को भी नोटिस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Indian Youth Congress के 5, रायसीना रोड स्थित दफ्तर को भी खाली करने का निर्देश दिया गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Abhishek Manu Singhvi ने इस कदम को “गैरकानूनी और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
नया मुख्यालय होने के बावजूद पुरानी जगह क्यों अहम?
हालांकि कांग्रेस ने पिछले साल आईटीओ के पास “इंदिरा भवन” में अपना नया मुख्यालय शुरू कर दिया था, लेकिन पार्टी अब भी अकबर रोड से काम कर रही है। नेताओं का कहना है कि यह स्थान सिर्फ एक ऑफिस नहीं, बल्कि पार्टी की विरासत, इतिहास और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।
पार्टी का यह भी दावा है कि वह इस संपत्ति के लिए बाजार दर के अनुसार किराया दे रही है, इसलिए इसे खाली करने का निर्देश अनुचित है।
क्या हो सकते हैं आगे के असर?
अगर कांग्रेस को यह परिसर खाली करना पड़ता है, तो यह प्रतीकात्मक रूप से एक बड़ा बदलाव होगा। इससे पार्टी की पारंपरिक पहचान और राजनीतिक संदेश पर असर पड़ सकता है। वहीं, विपक्ष इसे सरकार द्वारा दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी पेश कर सकता है।
फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस इस नोटिस के खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाती है और क्या अदालत से उसे राहत मिलती है या नहीं।





