
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर अब भारत की जीवनदायिनी नदियों पर साफ दिखने लगा है। जहाँ एक ओर उत्तर भारत की नदियाँ भारी बारिश और ग्लेशियर पिघलने से उफान पर रहने का अनुमान है, वहीं दक्षिण भारत की प्रमुख नदी कावेरी (Cauvery) के भविष्य को लेकर एक डरावनी रिपोर्ट सामने आई है।
IIT गांधीनगर के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, कावेरी बेसिन को 2026 से 2050 के बीच 3.5% जल की कमी का सामना करना पड़ सकता है। यह रिपोर्ट प्रतिष्ठित जर्नल Earth’s Future में प्रकाशित हुई है।
स्टडी के मुख्य बिंदु: क्यों कम हो रहा है कावेरी का जलस्तर?
आईआईटी गांधीनगर के शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत में औसत बारिश बढ़ने के बावजूद, कावेरी बेसिन इस लाभ से वंचित रह सकता है|
• अल्पकालिक गिरावट: अगले दो दशकों में नदी के प्रवाह में लगभग 3.5% की कमी आने की संभावना है।
• विपरीत स्थिति: एक तरफ उत्तर भारत की नदियाँ बाढ़ के लिए तैयार हो रही हैं, वहीं कावेरी “सूखने” की कगार पर है।
• कारण: क्षेत्रीय जलवायु पैटर्न में बदलाव और मानसून की अनिश्चितता को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच बढ़ सकता है तनाव
कावेरी जल बँटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना विवाद जगजाहिर है। बारिश की कमी वाले वर्षों में यह तनाव और गहरा हो जाता है। स्टडी के अनुसार, यदि भविष्य में पानी कम होता है, तो दोनों राज्यों के बीच जल बँटवारे को लेकर संघर्ष और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या है समाधान?
गोदावरी-कावेरी लिंक प्रोजेक्ट
- शोधकर्ताओं का सुझाव है कि इस संकट से निपटने के लिए नदी जोड़ो परियोजनाएं (River Interlinking Projects) अनिवार्य हो सकती हैं। विशेष रूप से प्रस्तावित गोदावरी-कावेरी लिंक प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण समाधान साबित हो सकता है। यह परियोजना अधिशेष पानी को संकटग्रस्त क्षेत्रों तक पहुँचाने में मदद करेगी।





