BRICS Summit 2026: दिल्ली में 12-13 सितंबर को जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, जानें क्या होगा खास

BRICS Summit 2026: भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS Summit की मेजबानी करने जा रहा है। इस बार का शिखर सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि BRICS अपने गठन के 20 साल पूरे कर रहा है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में समूह की अध्यक्षता कर चुका है।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम रखी है, जो ‘Humanity First’ दृष्टिकोण पर आधारित है। भारत की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
BRICS Summit में किन मुद्दों पर होगी चर्चा
नई दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
बैठक में मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार, सीमा पार भुगतान, राष्ट्रीय मुद्राओं के ज्यादा इस्तेमाल, MSME और स्टार्टअप को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
इसके अलावा Artificial Intelligence, Digital Technologies, Energy Security, Climate Resilience, Development Finance और वैश्विक संस्थानों में सुधार पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत ने रखे कई नए प्रस्ताव
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान कई नई पहलों का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें BRICS Global Value Chains Action Plan 2026-30, MSME के लिए Invoice-Discounting Mechanism और MSME Cooperation Portal शामिल हैं।
इसके अलावा Startup Innovation Fund, Digital Agriculture Network और किसानों के बीज अधिकारों से जुड़े मंच का प्रस्ताव भी सामने आया है।
ऊर्जा क्षेत्र में Smart Grid और Energy Storage से जुड़ी पहल, जलवायु अनुकूल शहरी बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स सहयोग और Digital Public Infrastructure Repository जैसे प्रस्ताव भी एजेंडे का हिस्सा हैं।
BRICS में 11 सदस्य देश
वर्तमान में BRICS में 11 सदस्य देश हैं। इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और UAE शामिल हैं।
इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम BRICS के पार्टनर देश हैं।
कौन-कौन से नेता होंगे शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी शामिल होने की उम्मीद है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत अन्य नेताओं के भी दिल्ली पहुंचने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
11 सितंबर से शुरू होंगी अहम गतिविधियां
BRICS Business Forum का आयोजन 11 सितंबर को भारत मंडपम में होगा। इसी दौरान Women’s Business Alliance की बैठक भी होगी।
इसके बाद 12 और 13 सितंबर को BRICS Leaders’ Summit आयोजित किया जाएगा। बैठक के अंत में संयुक्त Leaders’ Declaration जारी किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, इसकी अंतिम भाषा सभी सदस्य देशों की सहमति पर निर्भर करेगी।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद शिखर सम्मेलन में आम सहमति बनाने की चुनौती पेश कर सकते हैं।
दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था सख्त
BRICS Summit के चलते दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। VVIP काफिलों की आवाजाही के दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 22 डायवर्जन प्वाइंट और 35 से ज्यादा सड़कों की पहचान की है।
लोगों को प्रभावित रास्तों पर गैर-जरूरी यात्रा से बचने, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी गई है।
ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करने और यातायातकर्मियों के निर्देशों के अनुसार चलने की अपील की गई है। आपातकालीन और जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को प्राथमिकता से रास्ता दिया जाएगा।
11 सितंबर को सरकारी दफ्तर रहेंगे बंद
BRICS Summit की तैयारियों और VVIP आवाजाही को सुचारु रखने के लिए 11 सितंबर को दिल्ली में केंद्र सरकार के कार्यालय बंद रहेंगे। दिल्ली सरकार के कार्यालयों, स्वायत्त संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए भी अवकाश रहेगा।
भारत की अध्यक्षता में होने वाला BRICS Summit 2026 आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक शासन, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु और विकास से जुड़े मुद्दों पर समूह की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।





