नितिन गडकरी के खिलाफ Deepfake और भ्रामक पोस्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट का Meta, X और Google को सख्त निर्देश
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार को एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के तहत निशाना बनाने वाले डीपफेक वीडियो और अपमानजनक पोस्ट हटाने का आदेश। गडकरी ने 11 करोड़ रुपये के मानहानि का दावा किया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को मेटा (Meta), एक्स (X), गूगल (Google) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार को निशाना बनाने वाले सभी अपमानजनक पोस्ट और AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो तुरंत हटाए जाएं। यह पूरा विवाद एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों से जुड़ा है।
“पब्लिक प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की जगह नहीं”
जस्टिस आरिफ डॉक्टर की सिंगल-जज बेंच ने इन वायरल पोस्ट्स को “बेहद घटिया” और “अपमानजनक” करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री के लिए किसी भी पब्लिक प्लेटफॉर्म पर कोई जगह नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह युवाओं सहित सभी की पहुंच में है।
इसके साथ ही, कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों से कहा है कि वे एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाएं जिससे बार-बार कोर्ट के दखल के बिना ही ऐसे कंटेंट को आसानी से हटाया जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई अब चार हफ्ते बाद तय की गई है।
11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग
नितिन गडकरी ने एडवोकेट संदीप एस लड्डा के जरिए यह याचिका दायर की थी। सोशल मीडिया पर लगातार आरोप लगाए जा रहे थे कि ईबीपी (EBP) प्रोग्राम से गडकरी और उनके परिवार ने अनुचित आर्थिक लाभ उठाया है।
याचिका में कहा गया है कि ये पोस्ट पूरी तरह से झूठे, मनगढ़ंत और आधारहीन हैं। इनमें मंत्री पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पद के दुरुपयोग जैसे भ्रामक आरोप लगाए गए हैं। याचिका में यह भी बताया गया कि सामग्री में अभद्र और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिसके लिए गडकरी ने 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।
क्या है E20 पेट्रोल विवाद?
ईबीपी (EBP) प्रोग्राम मुख्य रूप से भारत के कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए लाया गया था। भारत ने साल 2030 के अपने मूल लक्ष्य से पांच साल पहले ही 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का टारगेट हासिल कर लिया है।
हाल ही में, कुछ वाहन चालकों ने शिकायत की थी कि E20 ईंधन से माइलेज कम हो रहा है और पुराने इंजनों में जंग लग रही है। हालांकि, सरकार और गडकरी ने इन दावों को सोशल मीडिया की भ्रामक जानकारी बताकर पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने हाई कोर्ट का रुख तब किया जब पिछले महीने बीजेपी के नागपुर सोशल मीडिया सेल के संयोजक शिशिर अरुण त्रिपाठी ने इन भ्रामक वीडियो और पोस्ट्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि ये दावे जनता को गुमराह कर सकते हैं और शांति भंग कर सकते हैं।





