अमरनाथ यात्रा 2025: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा बलों का फोकस अब यात्रा की सुरक्षा पर

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता के बाद अब केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने अपना पूरा ध्यान आगामी अमरनाथ यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा इंतजामों पर केंद्रित कर दिया है। इस वर्ष यात्रा 29 जून से शुरू हो रही है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंपी गई है। यह वही बल है जो पिछले कई वर्षों से अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है और हर बार बेहद व्यवस्थित व कड़े सुरक्षा प्रबंध करता आया है।
इस बार भी सीआरपीएफ की ओर से यात्रा मार्ग की चाक-चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह इन दिनों अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तीन दिवसीय कश्मीर दौरे पर हैं, जहां उन्होंने घाटी में तैनात सीआरपीएफ की 47 बटालियनों के रेंज डीआईजी और कमांडिंग अधिकारियों के साथ लंबी बैठक कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में यात्रा को लेकर बनी रणनीति, संभावित खतरे और उनकी रोकथाम के तरीकों पर गंभीर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, इस बार सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी प्राथमिकता फिदायीन हमलों और आईईडी विस्फोटों को रोकना है।
यात्रा मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए सीआरपीएफ ने ‘1000 मीटर थ्योरी’ को लागू करने की योजना बनाई है, जिसके तहत किसी भी आतंकी को यात्रा रूट के एक किलोमीटर के दायरे में भी आने की अनुमति नहीं होगी। हर एक किलोमीटर पर एक सुरक्षा चौकी या मोर्चा होगा, जहां जवान पूरी तरह हथियारों से लैस और सतर्क रहेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि यदि किसी भी मोर्चे पर कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो तो आस-पास का सुरक्षा दल बिना किसी देरी के वहां पहुंचकर हालात को काबू में ले सके। यात्रा मार्ग की पूरी किलेबंदी खुद सीआरपीएफ के जवानों द्वारा की जाएगी और वे खुद ही अपने मोर्चे तैयार करेंगे।
सीआरपीएफ इस दौरान यात्रा मार्ग पर ‘रोड ओपनिंग पार्टी’ (ROP) की 24 घंटे गश्त व्यवस्था भी सुनिश्चित करेगी, जो दिन-रात सड़क की निगरानी करेगी ताकि किसी भी प्रकार का खतरा यात्रियों के सामने न आए। श्रद्धालुओं के काफिले को सीआरपीएफ के एस्कॉर्ट वाहन सुरक्षा कवच प्रदान करेंगे। हालांकि अन्य सरकारी ड्यूटी में कर्मचारियों की ड्यूटी आठ घंटे निर्धारित होती है, लेकिन अमरनाथ यात्रा के दौरान सीआरपीएफ के जवान 14 से 16 घंटे तक लगातार ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। वे सुबह तड़के अपने हथियारों और आवश्यक उपकरणों के साथ निकलते हैं और दिनभर यात्रा रूट की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
यात्रा मार्ग पर इस बार हाईटेक निगरानी की भी व्यवस्था की जा रही है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से पूरे मार्ग की निगरानी की जाएगी। ड्रोन के माध्यम से उन स्थानों पर विशेष नजर रखी जाएगी जहां राशन सामग्री रखी जाती है या जहां यात्रियों के शिविर स्थापित होते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को त्रिस्तरीय बनाया गया है ताकि किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे। शिविरों पर हमले की आशंका को देखते हुए विशेष सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं।
सुरक्षा बलों ने टारगेट किलिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। यात्रा में शामिल वाहनों को ऐसे आधुनिक स्कैनर से गुजारा जाएगा, जो किसी भी संदिग्ध वस्तु की पहचान कर सके। आईईडी का पता लगाने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो आधुनिक तकनीकी उपकरणों और खोजी कुत्तों की मदद से जांच करेंगी। इसके साथ ही ड्रोन को मार गिराने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित शूटरों को तैनात किया जाएगा।





