कैश बरामदगी मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप साबित, संसद में रिपोर्ट पेश

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से बनाई गई तीन सदस्यीय समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश बरामदगी मामले में लगाए गए तीनों आरोपों को सही पाया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जस्टिस वर्मा अपने सरकारी आवास के स्टोर रूम से मिले नकदी के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
समिति का गठन जजेज (इंक्वायरी) एक्ट के तहत किया गया था। जांच के दौरान समिति ने कहा कि स्टोर रूम से मिली नकदी के स्रोत और उसके मालिकाना हक को लेकर जस्टिस वर्मा कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।
सबूतों को सुरक्षित रखने में भी खामी
समिति ने यह भी कहा कि घटनास्थल पर मौजूद सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टोर रूम को कानूनी तौर पर सील करने और उसकी जांच करने से पहले उसके साथ छेड़छाड़ या बदलाव हुआ था।
समिति ने जस्टिस वर्मा के जवाब को भी संतोषजनक नहीं माना। रिपोर्ट में कहा गया कि उनका जवाब स्पष्ट नहीं था और इस मामले में जिस पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी की उम्मीद थी, वह नजर नहीं आई।
रिपोर्ट में समिति ने साफ तौर पर कहा कि आरोपों से जुड़े तीनों चार्ज साबित होते हैं।
दो खंडों में संसद के सामने रखी गई रिपोर्ट
समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई। यह रिपोर्ट दो खंडों में है, जिसमें मामले से जुड़े मौखिक और दस्तावेजी सबूत शामिल हैं।
यह मामला 14 मार्च 2025 को जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद सामने आया था। आग के बाद उनके आवास के एक स्टोर रूम में जली हुई नकदी मिलने का दावा किया गया था। जस्टिस वर्मा ने बाद में इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, कानून मंत्रालय की ओर से अभी तक उनके इस्तीफे को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।




