अजय देवगन की ‘रेड 2’ ने मारी जोरदार वापसी, एक और फ्रेंचाइजी हिट देने को तैयार

लंबे समय बाद हिंदी सिनेमा में कोई फिल्म ऐसी देखने को मिली है जिसने दर्शकों को शुरुआत से अंत तक स्क्रीन से जोड़े रखा। जहां आमतौर पर सिनेमाघरों में फिल्म के बीच मोबाइल की रोशनी नजर आती है, वहीं ‘रेड 2’ ने दर्शकों को पूरी तरह बांधकर रखा। ये फिल्म उसी ईमानदार अफसर अमेय पटनायक की कहानी है, जिसे पहली बार दर्शकों ने 2018 की ‘रेड’ में देखा था।
इस बार भी अजय देवगन का किरदार पहले से कहीं अधिक सशक्त नजर आता है। निर्देशक राज कुमार गुप्ता ने एक बार फिर अपनी पकड़ साबित की है। फिल्म की स्क्रिप्ट को रितेश शाह ने लिखा है, जिसे जयदीप यादव और करण व्यास के सहयोग से और निखारा गया है। चुटीले संवाद और कसे हुए दृश्यों ने फिल्म को एक मजबूत आधार दिया है।
फिल्म में भ्रष्टाचार और सत्ता के गठजोड़ को जिस तरह से बेनकाब किया गया है, वह दर्शकों को झकझोर कर रख देता है। खासकर वह दृश्य जब अजय देवगन का किरदार खुद पर रिश्वत का आरोप लगवाकर खेल को पलट देता है, तालियों की गूंज से सिनेमा हॉल गूंज उठता है। फिल्म के अंतिम दृश्य में क्लासिक गाना ‘पैसा ये पैसा’ पूरी तरह पैसा वसूल साबित होता है।
रितेश देशमुख खलनायक की भूमिका में चौंकाते हैं। वह ‘एनिमल’ के बॉबी देओल जैसी खलनायकी को एक नया आयाम देते हैं। यशपाल शर्मा, अमित सियाल और बृजेंद्र काला जैसे कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को और मजबूती देती है। अमित सियाल का किरदार और यशपाल शर्मा का रोल रिवर्सल फिल्म को अलग ऊंचाई पर ले जाता है।
हाल के वर्षों में अजय देवगन की कई फिल्में जैसे ‘मैदान’, ‘सिंघम अगेन’, और ‘आजाद’ दर्शकों को लुभा नहीं सकीं, लेकिन ‘रेड 2’ से उन्होंने जोरदार वापसी की है। यह फिल्म न सिर्फ उनके अभिनय बल्कि उनके फ्रेंचाइजी स्टारडम को भी नया जीवन देती है।
संगीत पक्ष थोड़ा कमजोर जरूर है, लेकिन पूरी टीम की मेहनत, अभिनय, पटकथा और निर्देशन ने इसे एक यादगार अनुभव बना दिया है। ‘रेड 2’ ने यह साबित कर दिया है कि जब कहानी मजबूत हो, तो दर्शकों की पसंद अपने आप बदल जाती है।





