Fraud and Scamभारत

₹19.5 लाख मिलने का झांसा, महिला पुलिस इंस्पेक्टर से ₹5.4 लाख की ठगी; इंश्योरेंस अधिकारियों बनकर किया फ्रॉड

अहमदाबाद: साइबर ठग अब लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए उनकी निजी और आर्थिक जानकारी का सहारा ले रहे हैं। अहमदाबाद में ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 45 वर्षीय महिला पुलिस इंस्पेक्टर से कथित तौर पर ₹5.4 लाख की ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बताया और महिला को ₹19.5 लाख की पॉलिसी राशि दिलाने का भरोसा दिया।

महिला इंस्पेक्टर सिविल डिफेंस होम गार्ड्स में तैनात हैं। ठगी का एहसास होने के बाद उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

11 अगस्त को आया था पहला फोन

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला को 11 अगस्त को एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को एक इंश्योरेंस कंपनी के दिल्ली स्थित मुख्यालय का अधिकारी बताया।

सबसे पहले ठग ने महिला की दो मौजूदा इंश्योरेंस पॉलिसियों से जुड़ी जानकारी बताई। पॉलिसी की सही जानकारी सुनकर महिला को लगा कि फोन वास्तव में कंपनी की ओर से ही आया है।

कॉलर ने दावा किया कि एक एजेंट ने उनकी पॉलिसी की 80 फीसदी राशि के लिए दावा दाखिल किया है। इसके बाद उसने महिला की ओर से शिकायत दर्ज करने की बात कही और उन्हें एक शिकायत संख्या भी दी।

₹19.5 लाख मिलने की बात कहकर फंसाया

इसके बाद एक दूसरे व्यक्ति ने महिला को फोन किया और खुद को कंपनी का प्रबंधक बताया। उसने कथित तौर पर कहा कि महिला ने पॉलिसी के लिए ₹10.8 लाख जमा किए हैं और इस पर ₹8.7 लाख का ब्याज भी बन चुका है।

ठग ने दावा किया कि अगर महिला अपनी पॉलिसी बंद कराती हैं तो उन्हें कुल ₹19.5 लाख मिल सकते हैं।

हालांकि, रकम जारी करने से पहले उसने ₹99,227 की प्रक्रिया शुल्क जमा करने को कहा। महिला ने अलग-अलग किस्तों में QR कोड और बैंक खाते के जरिए यह रकम भेज दी।

GST के नाम पर फिर मांगे ₹4.4 लाख

कुछ समय बाद ठगों ने एक और बहाना बनाया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ₹19.5 लाख की रकम जारी करने के लिए करीब ₹4.4 लाख जीएसटी के रूप में जमा करना होगा। साथ ही यह भरोसा दिया गया कि भुगतान की गई रकम बाद में वापस कर दी जाएगी।

महिला ने ₹50,000 QR कोड के जरिए भेजे, जबकि करीब ₹3.9 लाख 19 और 20 अगस्त को दो अलग-अलग बैंक लेनदेन के जरिए ट्रांसफर किए।

इस तरह महिला से अब तक लाखों रुपये लिए जा चुके थे, लेकिन उन्हें इंश्योरेंस की कोई रकम नहीं मिली।

फिर कहा- अब ₹24.9 लाख मिलेंगे

24 अगस्त को ठगों ने महिला को दोबारा फोन किया। इस बार उन्होंने दावा किया कि पॉलिसी की राशि बढ़कर ₹24.9 लाख हो गई है।

इसके बाद उन्होंने रकम जारी करने के लिए महिला से कहा कि उनके इंश्योरेंस ई-अकाउंट में ₹5.1 लाख की राशि मौजूद होनी चाहिए।

बार-बार नई रकम की मांग किए जाने से महिला को पूरे मामले पर शक हुआ। इसके बाद उन्होंने 25 अगस्त को साइबर अपराध हेल्पलाइन से संपर्क किया और बाद में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

कैसे बचें ऐसे इंश्योरेंस फ्रॉड से?

इस मामले से साफ है कि ठग किस तरह असली पॉलिसी की जानकारी का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति का भरोसा जीत सकते हैं। इसलिए केवल पॉलिसी की सही जानकारी बताने वाले व्यक्ति पर भरोसा न करें।

अगर कोई फोन करके कहे कि आपको इंश्योरेंस की बड़ी रकम, मैच्योरिटी राशि या रिफंड मिलेगा, लेकिन उससे पहले प्रक्रिया शुल्क, जीएसटी, सत्यापन शुल्क या किसी अन्य नाम पर पैसे मांगे, तो तुरंत सावधान हो जाएं।

अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड स्कैन करके पैसे भेजना या किसी अपरिचित बैंक खाते में रकम जमा करना भी जोखिम भरा है।

किसी भी इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारी की पुष्टि हमेशा अपनी कंपनी के आधिकारिक ग्राहक सेवा नंबर या पॉलिसी दस्तावेज में दिए गए संपर्क माध्यम से करें। फोन करने वाले व्यक्ति द्वारा दिया गया नंबर इस्तेमाल करने के बजाय खुद आधिकारिक नंबर खोजकर संपर्क करें।

अगर आपके साथ ऑनलाइन आर्थिक ठगी हो जाती है, तो तुरंत अपने बैंक को सूचना दें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। सरकार के साइबर अपराध शिकायत मंच पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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