राजनीति

कैसे होता है भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन? यहां जानें सब कुछ

सोमवार, 21 अप्रैल का दिन भारतीय राजनीति के लिए उत्साह और हैरानी भरा रहा या कहें एक रोलरकोस्टर की तरह, क्योंकि आज सप्ताह का पहला दिन यानि सोमवार था तो वहीं मानसून सत्र का पहला दिन. दिन कि शुरुआत उत्साह, शोर और हंगामे के साथ शुरु हुई लेकिन दिन ढलते ही शाम को सत्र खत्म होने के बाद अचानक राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने सबको हैरान कर दिया.

 

मानसून सत्र खत्म होने के बाद अचानक राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. तब से राजनीति के गलियारे में यह चर्चा का विषय बन गया. लोगों में कयासों की चर्चा होने लगी कि अब अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा?

 

लेकिन उससे पहले क्यों ना यह जान लिया जाए कि आखिर उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे किया जाता है. क्या क्या योग्यताएं होनी चाहिए?

उपराष्ट्रपति बनने के चाहिए ये योग्यताएं

– भारत का नागरिक होना अनिवार्य है.
– 35 साल से ज्यादा उम्र न हो.
– राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता हो.
– राज्य या केंद्र सरकार से कोई पद लाभ न लेना पड़ा.

 

उपराष्ट्रपति का कितना होता है कार्यकाल

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है. अनुच्छेद 68(1) में लिखा है कि उपराष्ट्रपति की नियुक्ति वर्तमान उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति से पहले हो जानी चाहिए.

 

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कैसे होती है वोटिंग और काउंटिंग?

उपराष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदन भाग लेते हैं. राज्यसभा के 245 और लोकसभा के 543 सांसद मिलकर हिस्सा लेते हैं. उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति (प्रपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम) से होता है. इसमें वोटिंग को सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहते हैं. सदस्यों को एक बैलेट पेपर दिया जाता है. आम चुनाव को तरह सदस्य किसी एक प्रत्याशी को वोट नहीं करते हैं. बल्कि बैलेट पेपर में सभी प्रत्याशियों को पंसद के हिसाब से प्राथमिकता करते हुए 1, 2, 3 लिखना होता है. प्रत्याशी के आगे नंबर लिखना होता है. इसके बाद काउंटिंग के लिए सभी वोट को गिना जाता है. आधे वोट निकालकर 1 जोड़ दिया जाता है. उस संख्या को ही जीत के लिए बहुमत माना जाता है.

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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