विदेश

9/11 के बाद अमेरिका में नहीं उड़ रहे थे विमान, फिर एक खास उड़ान को क्यों दी गई मंजूरी?

11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों के बाद देश का पूरा हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया था। हजारों उड़ानें रोक दी गई थीं और आसमान में सन्नाटा था। लेकिन अगले ही दिन एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी सामने आई, जिसमें एक शख्स की जान बचाने के लिए इस नियम में असाधारण छूट दी गई।

मामला 62 वर्षीय लॉरेंस वैन सर्टिमा का था, जिन्हें दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक इनलैंड ताइपन ने काट लिया था। उनकी जान बचाने के लिए जिस खास जहररोधी दवा की जरूरत थी, वह अमेरिका में सिर्फ दो जगह उपलब्ध थी। ऐसे में दवा को सैन डिएगो से मियामी पहुंचाने के लिए एक विशेष विमान को उड़ान की अनुमति दी गई।

ताइपन के काटने से बिगड़ी हालत

लॉरेंस वैन सर्टिमा सांपों को संभालने का अनुभव रखते थे। 11 सितंबर की दोपहर वह एक इनलैंड ताइपन को पिंजरे में रखने की कोशिश कर रहे थे, तभी सांप ने उनके अंगूठे पर काट लिया।

इलाज के लिए उन्हें सड़क के रास्ते मियामी के बैपटिस्ट अस्पताल ले जाया गया, क्योंकि उस समय सभी नागरिक उड़ानें बंद थीं। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उन्हें गंभीर अंदरूनी रक्तस्राव होने लगा और उनकी आंखों, कानों और मुंह से भी खून आने लगा।

उपलब्ध पांचों शीशियां भी नहीं बचा सकीं जान

मियामी-डेड फायर रेस्क्यू के कैप्टन अल क्रूज ने सांप के काटने के मामलों के लिए विशेष वेनम वन यूनिट बनाई थी। उन्होंने वैन सर्टिमा को उपलब्ध जहररोधी दवा की सभी पांच शीशियां दे दीं, लेकिन इससे पर्याप्त फायदा नहीं हुआ।

डॉक्टरों को पता था कि उन्हें इनलैंड ताइपन के जहर के लिए विशेष रूप से तैयार जहररोधी दवा की जरूरत है।

उस समय अमेरिका में इस दवा की सिर्फ दो ज्ञात आपूर्तियां थीं। एक न्यूयॉर्क में और दूसरी सैन डिएगो चिड़ियाघर में थी।

छह घंटे की कोशिश के बाद FAA तक पहुंची बात

कैप्टन क्रूज ने दवा को मियामी पहुंचाने के लिए कई एजेंसियों से संपर्क किया। करीब छह घंटे की कोशिश के बाद अस्पताल और बचाव दल के अधिकारियों ने मामला फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) तक पहुंचाया।

रात के बाद एयर एंबुलेंस सेवा से जुड़े जॉनी डेलगाडो ने FAA के एक अधिकारी से संपर्क किया। उन्होंने साफ कहा कि अगर दवा समय पर नहीं पहुंची तो वैन सर्टिमा की जान नहीं बचेगी।

इसके बाद FAA ने विशेष उड़ान की अनुमति दे दी। हालांकि, शर्त रखी गई कि विमान को दिन की रोशनी में ही उड़ान भरनी होगी।

सैन डिएगो से दवा लेकर मियामी पहुंचा विमान

12 सितंबर की सुबह विमान फोर्ट लॉडरडेल से सैन डिएगो के लिए रवाना हुआ। वहां पहुंचने के बाद विमान में ईंधन भरा गया और सैन डिएगो चिड़ियाघर से जहररोधी दवा लाई गई।

सैन डिएगो हार्बर पुलिस के सदस्यों ने दवा को एक छोटे लाल कूलर में रखकर विमान के चालक दल को सौंपा। इसके बाद विमान मियामी के लिए रवाना हुआ।

पायलटों ने बाद में इस उड़ान को बेहद अजीब अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि आसमान में लगभग कोई दूसरा विमान नहीं था और रेडियो पर भी सामान्य दिनों जैसी आवाजाही नहीं थी।

अस्पताल पहुंचने के 45 मिनट के अंदर मिला इलाज

विमान शाम करीब 4:30 बजे मियामी के तत्कालीन केंडल-टैमी एक्जीक्यूटिव एयरपोर्ट पर उतरा। वहां एक मेडिकल हेलीकॉप्टर पहले से इंतजार कर रहा था।

दवा को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और विमान के पहुंचने के करीब 45 मिनट के भीतर डॉक्टरों ने वैन सर्टिमा को जहररोधी दवा दे दी।

इसके बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और वह आखिरकार ठीक हो गए।

वैन सर्टिमा ने इस पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए उन सभी लोगों की तारीफ की, जिन्होंने 9/11 के बाद बने असाधारण हालात के बावजूद उनकी जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने उनकी जान बचाने के लिए हर हद पार कर दी और शानदार काम किया।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button