‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 70 साल के रिटायर्ड कर्मचारी से 52 लाख की ठगी

हैदराबाद: हैदराबाद में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी और जांच एजेंसियों के बड़े अधिकारी बताकर 70 साल के रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को फर्जी केस में गिरफ्तार करने की धमकी दी। इसके बाद उनसे 52 लाख रुपये ठग लिए।
पीड़ित राम कृष्णापुरम के रहने वाले हैं। उन्हें 22 अगस्त को एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित के खिलाफ अवैध विज्ञापन, परेशान करने और धोखाधड़ी से जुड़े मामले में केस दर्ज हुआ है।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल में कुछ और लोगों को जोड़ लिया। इन लोगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), महाराष्ट्र पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वरिष्ठ अधिकारी बताया।
ठगों ने पीड़ित से कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े डेबिट कार्ड का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लेनदेन में हुआ है। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार करने और उनके बैंक खाते व दूसरी संपत्तियां फ्रीज करने की धमकी दी गई।
कानूनी कार्रवाई के डर से पीड़ित ठगों के झांसे में आ गए। उन्होंने 25 अगस्त को ठगों की ओर से बताए गए बैंक खाते में 52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने इसे ‘RBI वेरिफिकेशन’ के लिए जरूरी भुगतान बताया था।
पैसे भेजने के बाद जब रकम वापस नहीं मिली और ठगों ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब पीड़ित को समझ आया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, विश्वासघात, पहचान बदलकर ठगी, जालसाजी और जबरन वसूली से जुड़ी धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बढ़ रही ठगी
यह घटना साइबर ठगों के उस तरीके का उदाहरण है, जिसमें वे पुलिस, जांच एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को डराते हैं।
ठग पीड़ितों को गिरफ्तारी, बैंक खाते फ्रीज होने या किसी गंभीर अपराध में फंसने का डर दिखाते हैं। इसके बाद जांच या वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
पुलिस लगातार लोगों को ऐसे फर्जी कॉल और वीडियो कॉल से सावधान रहने की सलाह देती है। किसी भी अधिकारी के कहने पर घबराकर पैसे ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।





