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भारत और ईरान के बीच हुई चाबहार पोर्ट की डील, जानें भारत को क्या होगा फायदा

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भारत और ईरान के बीच हुई चाबहार पोर्ट की डील, जानें भारत को क्या होगा फायदा

 

ईरान और भारत के बीच चाबहार बंदरगाह से संबंधित एक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए गए है। इस कदम को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसके बड़े क्षेत्रीय प्रभाव होंगे। इस समझौते से दक्षिण एशिया से मध्य एशिया के बीच ईरान के रस्ते एक नया ट्रेड रूट खुलेगा।  इस समझौते से रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक के रास्ते खुल गए हैं।

इस डील के तहत, भारत की IPGL 12 करोड़ डॉलर का इन्वेस्टमेंट करेगी। इसके अलावा 25 करोड़ डॉलर का लोन भी दिया जाएगा। इस तरह से ये पूरा समझौता कुल 37 करोड़ डॉलर का हो गया है। बता दें कि भारत पहले से ही चाबहार पोर्ट के शाहिद बहिश्ती टर्मिनल का कामकाज संभाल रहा था. लेकिन ये शॉर्ट-टर्म एग्रीमेंट था. इसे समय-समय पर रिन्यू करना पड़ता था. पर अब 10 साल के लिए लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट हो गया है। चाबहार पोर्ट के शाहिद बहिश्ती टर्मिनल का कामकाज संभालने के लिए भारत और ईरान के बीच 2016 में समझौता हुआ था।

चाबहार जहां स्थित है, वहां से पाकिस्तान की सीमा भी लगती है। इसलिए अभी तक भारत को अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान की जरूरत पड़ती थी। यह पाकिस्तान में बन रहे ग्वादर पोर्ट के भी नजदीक है। चाबहार और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते में सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है। इसे आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है, जिससे ईरान के माध्यम से रूस के साथ भारत की कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी। बता बता दें कि 7200 किलोमीटर लंबा ये कॉरिडोर भारत को ईरान, अजरबैजान के रास्ते होते हुए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ेगा।

भारत और ईरान के बीच हुए इस समझौते को चीन और पाकिस्तान के लिए झटका माना जा रहा है. चीन, पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट बना रहा है। ग्वादर पोर्ट और चाबहार पोर्ट के बीच सड़क के रास्ते 400 किलोमीटर की दूरी है. जबकि, समंदर के जरिए ये दूरी 100 किलोमीटर के आसपास है। ग्वादर पोर्ट में चीन की मौजदूगी की वजह से चाबहार पोर्ट में भारत का होना फायदेमंद है. चाबहार पोर्ट में भारत की मौजूदगी चीन और पाकिस्तान की गोलबंदी को तगड़ा जवाब देगी।